एसपी विनोद कुमार मीना की रणनीति से हथियारों के नेटवर्क की परतें खुलने लगीं, दो राज्यों में एक साथ पहुंची भानपुरा पुलिस की टीमें; हथियारों की सप्लाई चेन खंगालने में जुटी पुलिस मंदसौर। जिले में अवैध हथियारों के खिलाफ मंदसौर पुलिस की कार्रवाई अब एक बड़े नेटवर्क की पड़ताल तक पहुंच गई है। भानपुरा थाना क्षेत्र में 2 पिस्टल और 700 जिंदा कारतूस के जखीरे की बरामदगी के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश तक अपनी पहुंच बनाई है। मामले में लगातार कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस ने अब दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक आरोपी उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से जबकि दूसरा उज्जैन जिले के नागदा से पकड़ा गया है। इस तरह शुरुआती चार गिरफ्तारियों के बाद अब मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या छह हो गई है। इस कार्रवाई की खास बात यह है कि पुलिस ने बरामद हथियारों और कारतूसों के मामले को केवल स्थानीय स्तर की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उनके स्रोत और सप्लाई से जुड़े लोगों तक पहुंचने के लिए दो अलग-अलग टीमें मैदान में उतारीं। पुलिस की इस सक्रियता से अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त से जुड़े नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आने लगी हैं। मैनपुरी से लेकर नागदा तक पुलिस की तलाश, दो टीमों ने एक साथ की कार्रवाई पुलिस अधीक्षक मंदसौर श्री विनोद कुमार मीना के निर्देश पर अवैध हथियार रखने और उनकी खरीद-फरोख्त में शामिल लोगों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गरोठ श्री रामसनेही मिश्रा एवं एसडीओपी गरोठ श्री विजय कुमार यादव के मार्गदर्शन में भानपुरा पुलिस ने इस प्रकरण की जांच को आगे बढ़ाया। पुलिस के अनुसार, मामले में पहले से गिरफ्तार आरोपी फरमान खान से मिली जानकारी के आधार पर तत्काल दो विशेष टीमें गठित की गईं। पहली टीम उत्तर प्रदेश के आगरा, फतेहपुर सीकरी और मैनपुरी में आरोपी की तलाश में जुटी। तकनीकी साक्ष्यों, पुलिस की व्यावसायिक दक्षता और मुखबिर तंत्र की मदद से टीम ने मैनपुरी निवासी दीपक उर्फ दीपू शर्मा (41) को गिरफ्तार कर लिया। वहीं दूसरी टीम ने उज्जैन जिले के महिदपुर क्षेत्र में तलाश करते हुए नागदा निवासी जुबेर पिता इब्राहिम खान (30) को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक जुबेर इस मामले में दो पिस्टल उपलब्ध कराने वाला आरोपी है। इस गिरफ्तारी से हथियारों की आपूर्ति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कड़ी सामने आई है। मालीपुरा तिराहे पर पकड़ा था हथियारों का बड़ा जखीरा दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत 26 अक्टूबर को भानपुरा थाना क्षेत्र के मालीपुरा तिराहे से हुई थी। भैसोदामंडी चौकी पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि चार व्यक्ति अवैध हथियारों के साथ वहां पहुंचने वाले हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल घेराबंदी कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2 पिस्टल, 700 जिंदा कारतूस और 4 एंड्रॉयड मोबाइल फोन जब्त किए थे। जब्त सामग्री की कुल अनुमानित कीमत 4 लाख 26 हजार रुपये बताई गई थी। इसमें 3 लाख 15 हजार रुपये के 700 कारतूस, 40 हजार रुपये की दो पिस्टल और 71 हजार रुपये के चार मोबाइल फोन शामिल थे। इतनी बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस मिलने के बाद पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के संपर्कों, हथियारों के स्रोत, बैंक लेन-देन और मोबाइल कॉल डिटेल की जांच शुरू की। इसी जांच के आगे बढ़ने पर उत्तर प्रदेश और नागदा से दो और गिरफ्तारियां संभव हो सकीं। केवल बरामदगी नहीं, हथियारों के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश इस प्रकरण में पुलिस की कार्रवाई का महत्वपूर्ण पहलू हथियारों की सप्लाई चेन का पता लगाना है। शुरुआत में मालीपुरा तिराहे से चार आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, लेकिन पुलिस ने पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास जारी रखा, जिनकी भूमिका हथियारों की उपलब्धता और आपूर्ति में रही। मैनपुरी से दीपक उर्फ दीपू की गिरफ्तारी और नागदा से जुबेर को पकड़ा जाना इसी जांच का अगला चरण है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हथियारों की खरीद-फरोख्त में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, कारतूस कहां से लाए गए थे तथा इनकी सप्लाई किन लोगों तक की जानी थी। इस मामले में पहले की पूछताछ के आधार पर अवैध हथियारों की पूर्व में हुई खरीद-फरोख्त और अन्य संभावित संपर्कों की जांच का उल्लेख किया गया है। हालांकि इस पूरे नेटवर्क की वास्तविक सीमा का खुलासा पुलिस की आगे की जांच के बाद ही हो सकेगा। एसपी विनोद मीना के निर्देश, भानपुरा पुलिस की सक्रियता से लगातार खुल रही कड़ियां अवैध हथियारों के विरुद्ध मंदसौर पुलिस की इस कार्रवाई में पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार मीना की सख्त कार्यप्रणाली और अपराधियों के नेटवर्क तक पहुंचने की रणनीति महत्वपूर्ण रही है। उनके निर्देश पर अधिकारियों के मार्गदर्शन में स्थानीय पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई के साथ विवेचना को भी आगे बढ़ाया। इस पूरे अभियान में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गरोठ रामसनेही मिश्रा, एसडीओपी गरोठ विजय कुमार यादव के मार्गदर्शन तथा थाना प्रभारी भानपुरा उप निरीक्षक विनय बुंदेला, चौकी प्रभारी भैसोदामंडी उप निरीक्षक धर्मेश यादव और उनकी टीम की सराहनीय भूमिका रही। कुल मिलाकर, 700 जिंदा कारतूस और दो पिस्टल की बरामदगी से शुरू हुआ यह मामला अब अंतरराज्यीय संपर्कों की जांच तक पहुंच चुका है। मैनपुरी और नागदा से दो और गिरफ्तारियां इस बात का संकेत हैं कि मंदसौर पुलिस की जांच का फोकस केवल हथियार बरामद करने तक नहीं, बल्कि उनके पीछे सक्रिय सप्लाई नेटवर्क की पहचान और उसे तोड़ने पर भी है। अब निगाहें पुलिस की आगामी जांच और उन संभावित खुलासों पर रहेंगी, जिनसे अवैध हथियारों के इस कारोबार की अन्य कड़ियां सामने आ सकती हैं।