खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी का जीवन संघर्ष, मेहनत और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण की कहानी रहा। मूल रूप से धार जिले की सरदारपुर तहसील के ग्राम बरमंडल निवासी दिलीप पुरी की प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई। इसके बाद उन्होंने धार कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की। दिलीप पुरी को शुरू से ही शासकीय सेवा में जाने का जुनून था। इसी लक्ष्य को लेकर उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। इस दौरान उनका चयन शिक्षक के पद पर भी हो गया। उन्होंने धार जिले की बदनावर तहसील के ग्राम दौतरीया में लगभग दो वर्षों तक सरकारी शिक्षक के रूप में सेवाएं दीं। हालांकि, उनका सपना पुलिस विभाग में जाकर देश और समाज की सेवा करना था। अपने इस सपने को साकार करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी। शारीरिक और बौद्धिक परीक्षाओं की तैयारी करते हुए आखिरकार उन्होंने पुलिस सेवा में सफलता हासिल की और पुलिस अधिकारी के रूप में अपनी पहचान बनाई। परिवार में पीछे छोड़ गए दो बच्चे दिलीप पुरी के परिवार में 16 वर्ष की बेटी और 11 वर्ष का बेटा है। उनके निधन की खबर से धार जिले के ग्राम बरमंडल सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। एक शिक्षक से पुलिस अधिकारी तक का उनका सफर युवाओं के लिए मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण की प्रेरक कहानी है।